मौन, क्रोध का अमोघ उपचार है:-साध्वी श्री प्रतीक्षा श्री जी महाराज साहब आचार्य भगवन के ए_1_9 आयाम का खिरकिया में भी हुआ भव्य आयोजन।
मौन, क्रोध का अमोघ उपचार है:-साध्वी श्री प्रतीक्षा श्री जी महाराज साहब
आचार्य भगवन के ए_1_9 आयाम का खिरकिया में भी हुआ भव्य आयोजन।
खिरकिया हरदा से संवाददाता संजय नामदेव की रिपोर्ट
खिरकिया। समता भवन में विराजित शासन दीपिका श्री दर्शना श्री जी महाराज साहब, श्री रिद्धि प्रभा जी महाराज एवं श्री प्रतीक्षा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा 3 के सानिध्य में श्रद्धाशील उपासक जिनवाणी का अमृत रस पान का लाभ ले रहे हैं। आज दिनांक 21/08/2022 को खिरकिया कुल दीपिका श्री प्रतीक्षा श्री जी महाराज साहब ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि -कषाय का सामान्य अर्थ है -जिससे संसार की अभिवृद्धि हो, आत्मा का पतन हो ।आत्मा अपने स्वभाव को छोड़कर विभाव की दशा में परिणमन करें, उसे कषाय कहते हैं। कषाय के मुख्य रूप से चार भेद हैं -क्रोध, मान, माया और लोभ। कषाय का पहला भेद क्रोध है ।क्रोध के कारण आत्मा आवेश में आ जाती है ,अशांत एवं तप्त हो जाती है। क्रोधित व्यक्ति अपने हिताहित का मान भूल जाता है ,विवेक खो बैठता है तथा स्व-पर का नाश करने को तैयार हो जाता है।क्रोध भयंकर अग्नि है, जिससे क्रोधी स्वयं भी जलता है और दूसरों को भी जलाता है। क्रोध विष के समान है। क्रोध दुर्गति का कारण है। क्रोध करने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। क्रोध बुद्धिमान को बुद्धिहीन ,कुलवान को कुलहिन और भले को बुरा बना देती है ।क्रोध मुख्यतः चार कारणों से आता है।पहला - मन के अनुकूल कार्य नहीं होने से दूसरा -अपेक्षा की जगह उपेक्षा हो जाने से तीसरा -अधिकारों की अवेहलना होने से चौथा -अहंकार पर चोट लगने से । क्रोध करने से ज्ञान, वात्सल्य और सम्मान घटता है और जन्म मरण बढ़ता है। उन्होंने आगे कहा कि -यदि व्यक्ति दूसरों के दोष देखने के बजाय स्वयं के दोष देखने लगे तो संभवत है क्रोध उत्पन्न ही ना हो। क्रोध का प्रसंग उपस्थित होने पर समभाव को धारण करना चाहिए। क्रोध को क्षमा से जीता जा सकता है। मौन, क्रोध का अमोघ उपचार है ।इसके पूर्व उन्होंने कहा कि -तीर्थंकर भगवान का चैतन्य प्रकाश 12 सूर्य के प्रकाश से भी अधिक होता है ।उनका यह प्रकाश तीनों लोकों के प्रकाश को परास्त करने वाला होता है। तीर्थंकर भगवान का प्रभामंडल होता है । तीर्थंकर भगवान अपने स्वयं के भाव से प्रभामंडल का निर्माण करते हैं ।व्यक्ति प्रभामंडल का निर्माण उच्च कोटि की साधना करके कर सकता है। प्रभामंडल महापुरुषों का ही होता है।
आचार्य भगवन श्री रामलाल जी महाराज साहब द्वारा दिए गए आयाम ए_1_ 9 जिसमें 90 श्रावक श्राविकाओ एवं गुरु भक्तों, सत्संग प्रेमी ने लाभ लिया। 9 नवकार मंत्र की आराधना के साथ 9 आइटम की मर्यादा के साथ 9 मिनट में एकसने का आहार करना सभी के लिए किसी आश्चर्य (चैलेंज) से कम नही था लेकिन देव गुरु व धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा का परिचय देते हुए श्रद्धानिष्ठ उपासको ने समय से पूर्व ही संपूर्ति कर अपनी अटूट श्रद्धा का परिचय दिया एवम श्री श्वेतांबर जैन श्री संघ खिरकिया का गौरव बड़ाया। जिसका संपूर्ण लाभ धर्मनिष्ठ, सुश्रावक अशोक कुमार सुमित कुमार सांड परिवार खिरकिया ने लिया। महासतीजी की प्रेरणा से तपस्या के क्रम में 20 उपवास के पचकान शालू भंडारी ने ग्रहण कर परिवार का गौरव बड़ाया। लाइफ चेंजिंग चातुर्मास में महाराज साहब के दर्शन करने एवम जिनवाणी का लाभ लेने हेतु जलगांव, सांवेर,चारूवा ,मनावर ,गुड़ी ,आदि श्री संघों के सदस्य उपस्थित थे।चारूवा एवम गुड़ी श्री संघों के सदस्यों ने भी एकासना तप किया।
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