मुख्य सचिव ने मंत्रालय महानदी भवन में नवा अंजोर विजन@ 2047 मॉनिटरिंग पोर्टल की समीक्षा की

मुख्य सचिव ने मंत्रालय महानदी भवन में नवा अंजोर विजन@ 2047 मॉनिटरिंग पोर्टल की समीक्षा की

स्थानीय संपादक रायपुर रेखा चौधरी




रायपुर, ।
मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ नवा अंजोर विजन@ 2047 मॉनिटरिंग पोर्टल की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के सचिव उपस्थित रहे।
मुख्य सचिव ने नवा अंजोर विजन@ 2047 के अंतर्गत निर्धारित इंडिकेटर्स की राज्य स्तरीय समीक्षा करते हुए सभी विभागीय सचिवों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने विभाग से संबंधित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति, निर्धारित लक्ष्यों की नियतकालिक उपलब्धि तथा अद्यतन जानकारी मॉनिटरिंग पोर्टल में समय-समय पर दर्ज करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि पोर्टल के माध्यम से योजनाओं की प्रगति की प्रभावी निगरानी एवं मूल्यांकन संभव है, जिससे राज्य के विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में गति आएगी।

मुख्य सचिव ने सभी विभागीय सचिवों को अपने विभागीय डैशबोर्ड पर ऑनलाइन प्रगति की नियमित समीक्षा करने तथा निर्धारित इंडिकेटर्स के अनुरूप कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।

बैठक में विजन 2047 के लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति हेतु समन्वित एवं परिणामोन्मुख कार्यवाही पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने मंत्रालय महानदी भवन में नवा अंजोर विजन@ 2047 मॉनिटरिंग पोर्टल की समीक्षा की मुख्य सचिव ने मंत्रालय महानदी भवन में नवा अंजोर विजन@ 2047 मॉनिटरिंग पोर्टल की समीक्षा की Reviewed by dainik madhur india on 4:32 AM Rating: 5

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने भगवान राजीव लोचन एवं कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में की पूजा अर्चना : महानदी महाआरती में हुए शामिल, छत्तीसगढ़ की समृद्धि की प्रार्थना की*

*मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने भगवान राजीव लोचन एवं कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में की पूजा अर्चना : महानदी महाआरती में हुए शामिल, छत्तीसगढ़ की समृद्धि की प्रार्थना की*

रेखा चौधरी स्थानीय संपादक रायपुर




रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने धर्म नगरी राजिम में आयोजित राजिम कुंभ कल्प 2026 के भव्य समापन अवसर पर सर्वप्रथम प्राचीन एवं ऐतिहासिक राजीव लोचन मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भगवान श्री राजीव लोचन के श्रीचरणों में नमन करते हुए उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगलकामना की। उन्होंने कहा कि यह पावन तीर्थ हमारी सनातन आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है।




इसके पश्चात मुख्यमंत्री श्री साय ने त्रिवेणी संगम के मध्य स्थित कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में जलाभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने प्रदेश की निरंतर प्रगति, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि राजिम कुंभ कल्प केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक एकता और लोक परंपराओं का विराट उत्सव है, जो समाज को जोड़ने का कार्य करता है।




मंदिर दर्शन के उपरांत मुख्यमंत्री श्री साय महानदी तट पर आयोजित भव्य महाआरती में शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और दीपों की पावन ज्योति से आलोकित वातावरण ने पूरे संगम क्षेत्र को दिव्य आभा से भर दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रद्धापूर्वक महानदी मैया की आरती उतारकर प्रदेश की उन्नति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राजिम कुंभ कल्प हमारी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है और यह सामाजिक सद्भाव, विश्वास तथा समरसता को सुदृढ़ करता है।

इस अवसर पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री दयालदास बघेल, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, राजिम विधायक श्री रोहित साहू, अभनपुर विधायक श्री इंद्र कुमार साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, साधु-संत एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने भगवान राजीव लोचन एवं कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में की पूजा अर्चना : महानदी महाआरती में हुए शामिल, छत्तीसगढ़ की समृद्धि की प्रार्थना की* मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने भगवान राजीव लोचन एवं कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में की पूजा अर्चना : महानदी महाआरती में हुए शामिल, छत्तीसगढ़ की समृद्धि की प्रार्थना की* Reviewed by dainik madhur india on 4:19 AM Rating: 5

राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की अस्मिता एवं पहचान – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय* *राजिम में सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला हेतु 50 लाख रुपये की घोषणा*

*राजिम कुंभ कल्प 2026 समापन समारोह*

*राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की अस्मिता एवं पहचान – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय*

*राजिम में सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला हेतु 50 लाख रुपये की घोषणा*

रेखा चौधरी स्थानीय संपादक रायपुर




रायपुर/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजिम में आयोजित राजिम कुंभ कल्प 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प केवल एक धार्मिक मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और पहचान का प्रतीक पर्व है।




मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए राजिम में सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला निर्माण हेतु 50 लाख रुपये की घोषणा की। साथ ही, राजिम बैराज कार्य को शीघ्र प्रारंभ करने और पूर्व में प्रस्तावित विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने मुख्य मंच पर भगवान राजीव लोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत भगवान श्री राजीव लोचन, कुलेश्वर महादेव, राजिम दाई, छत्तीसगढ़ महतारी और भारत माता के जयघोष के साथ की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम की पावन भूमि सदियों से तप, त्याग और साधना की साक्षी रही है। “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” कहे जाने वाला राजिम अपनी आध्यात्मिक गरिमा के कारण विशेष स्थान रखता है।

महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान शिव त्याग, संयम और सेवा के प्रतीक हैं, जिनका संदेश आज के युग में संतुलन और समर्पण का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए आवागमन, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य सेवा, प्रकाश व्यवस्था एवं सुरक्षा के व्यापक प्रबंध सुनिश्चित किए गए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में राजिम कुंभ मेला-स्थल को और अधिक सुव्यवस्थित एवं भव्य बनाया जाएगा तथा इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित आध्यात्मिक आयोजन के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा युवा पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का आह्वान किया।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयाल दास बघेल ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का विराट उत्सव है। इस वर्ष पंचकोसी धाम और द्वादश ज्योतिर्लिंग की थीम ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है और इसे राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध है, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

कार्यक्रम में राजिम विधायक रोहित साहू, अभनपुर विधायक इंद्रकुमार साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा एवं साधु-संतों की गरिमामय उपस्थिति थी।
राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की अस्मिता एवं पहचान – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय* *राजिम में सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला हेतु 50 लाख रुपये की घोषणा* राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की अस्मिता एवं पहचान – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय*  *राजिम में सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला हेतु 50 लाख रुपये की घोषणा* Reviewed by dainik madhur india on 4:08 AM Rating: 5

डॉ. अम्बेडकर पार्क की प्रस्तावित भूमि से अवैध अतिक्रमण हटवाने ग्रामीणों ने की मांग दैनिक मधुर इंडिया।

डॉ. अम्बेडकर पार्क की प्रस्तावित भूमि से अवैध अतिक्रमण हटवाने ग्रामीणों ने की मांग


दैनिक मधुर इंडिया।


राजगढ़।ग्राम बमोरी के  ग्रामवासियों ने तहसीलदार से मांग करते तात्कालीन
कलेक्टर जे.एन. कंसोटिया के आदेशानुसार ग्राम बमोरी में सर्वे नम्बर 54/1 रक्बा 3.550 हैक्टयर भूमि में से सर्वे नम्बर 54/8 रक्बा 0.253 भूमि डॉ.
अम्बेडकर पार्क निर्माण हेतु आवंटित की गई थी। वर्तमान में यहां भूमि ऑनलाईन भू-अभिलेख दस्तावेज में 54 / 1/2 नाम से दर्ज है।बताया गया कि उक्त भूमि पर हम ग्रामवासी ग्राम पंचायत एवं जनसहयोग के द्वारा पार्क निर्माण करना चाहते है। उक्त भूमि पर रामचन्दर भिलाला पिता देवीलाल भिलाला ने अवैध रूप
से अतिक्रमण कर रखा है एवं इस पर खरीफ तथा रबी की फसल पैदा करता है,जिसमें उसका भाई विक्रम भिलाला सरकारी कोटवार भी संलिप्त है। यह कि 14 अप्रैल 2026 को डॉ. अम्बेडकर जयंती के अवसर पर ग्राम पंचायत एवं जनसहयोग से पार्क निर्माण का कार्य प्रारम्भ किया जायेगा।ग्रामीणों ने निवेदन करते हुए उक्त अवधि के पूर्व डॉ. अम्बेडकर पार्क निर्माण हेतु प्रस्तावित भूमि पर से अवैध अतिक्रमण हटवाने मांग की है।
डॉ. अम्बेडकर पार्क की प्रस्तावित भूमि से अवैध अतिक्रमण हटवाने ग्रामीणों ने की मांग दैनिक मधुर इंडिया। डॉ. अम्बेडकर पार्क की प्रस्तावित भूमि से अवैध अतिक्रमण हटवाने ग्रामीणों ने की मांग   दैनिक मधुर इंडिया। Reviewed by dainik madhur india on 1:59 AM Rating: 5

भारतीय संस्कृति के महान संरक्षक : स्वामी श्रद्धानंद-१-डॉ. नितिन सहारिया, महाकौशल

भारतीय संस्कृति के महान संरक्षक : स्वामी श्रद्धानंद-१-डॉ. नितिन सहारिया, महाकौशल


सन 1898 की बात है 'आर्य प्रतिनिधि सभा' पंजाब ने धर्म और जातियता ( हिंदु/आर्य धर्म ) की शिक्षा देने के लिए भारतवर्ष के प्राचीन आदर्श ऋषि परंपरा पर एक 'गुरुकुल' खोलने का प्रस्ताव पास किया। सभा में वक्ताओं ने कहा - " अंग्रेजी ढंग की विदेशी शिक्षा के प्रभाव से नवयुवकों में से अपने धर्म और संस्कृति की भावना दिन पर दिन घटती जाती है, वे विदेशी सभ्यता की तरफ आकर्षित होते जाते हैं।  यदि इस पतनोंन्मुख प्रवाह को रोकना है तो वैदिक सिद्धांतों के अनुकूल एक आदर्श शिक्षण संस्था की स्थापना आवश्यक है।" प्रस्ताव तो पास कर दिया गया और ऐसे गुरुकुल के लिए धन और विद्यार्थी प्राप्त करना सहज न था। उस समय तक लोगों ने गुरुकुल का नाम भी न सुना था। जब उनको प्राचीन शास्त्रों में वर्णित ऋषि मुनियों के उन गुरुकुलों का वर्णन सुनाया जाता था, जिनमें विद्यार्थी ब्रह्मचारी बनकर अपने निर्वाह की व्यवस्था स्वयं करके 18 -20 वर्ष तक वेदादि विधाओं का अध्ययन करते थे और उतने समय तक गुरुओं के आश्रम में ही रहते थे, तो लोग आश्चर्य करने लगते थे। वे हंसकर कहते-  श्रीमान जी! इस अंग्रेजी शिक्षा के जमाने में कौन 10 -20 वर्ष तक सिर मुड़ा कर जंगलों में रहेगा और संस्कृत जैसी 'मृत -भाषा' को पढ़ेगा।पर 'आर्य प्रतिनिधि सभा' के अध्यक्ष लाला मुंशीराम जी (1856 से 1926 ,बाद में स्वामी श्रद्धानंद के नाम से विख्यात) जिन्होंने इस प्रस्ताव को पास कराया था ,दूसरी धातु के बने मनुष्य थे। वे इस योजना में आने वाली महान कठिनाइयों और लोगों की उदासीनता की बात को अच्छी तरह समझते थे। इसलिए प्रस्ताव के पास होते ही सभा स्थल पर उन्होंने यह प्रतिज्ञा की कि- *"जब तक मैं गुरुकुल के लिए ₹30000 इकट्ठा न कर लूंगा घर में पैर न रखूंगा।"यह एक ऐसे व्यक्ति की प्रतिज्ञा थी जिसे अपने सिद्धांतों और आत्म शक्ति पर अटल श्रद्धा थी। बस वे अपना काम- धाम छोड़कर भारत के अनेक शहरों का दौरा करने लगी और डेढ़ वर्ष में 30000 की बजाय ₹40000 एकत्रित करके दिखा दिया। इसके बाद गुरुकुल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की समस्या सामने आई ,तो उन्होंने सबसे पहले अपने दोनों पुत्रों इंद्र और हरिश्चंद्र को उसमें दाखिल किया। फिर अपने खास मित्रों के 10- 15 बच्चों को इकट्ठा किया। *हरिद्वार में कनखल के पास हिमालय की तराई में 'कांगड़ी' नाम का गांव दान में प्राप्त करके वहीं 'गुरुकुल' की स्थापना की गई।* आज तो गुरुकुल मामूली सी बात बन गई है और छोटी-छोटी जातियों ने अपने गुरुकुल नामदानी स्वतंत्र संस्थाएं शहरों में ही खोली हैं। पर आज से लगभग 125 वर्ष पूर्व एक जंगली स्थान में जहां अक्सर बाघ, जंगली हाथी घूमा करते थे। छोटे बालकों का उत्तरदायित्व ग्रहण करके कोई शिक्षण संस्था खोलना साधारण साहस का काम ना था। पर *मुंशीराम ( श्रद्धानंद) जी इतने कर्तव्य परायण और सेवाभावी थे कि आरंभ से ही सभी बच्चों की देख-भाल अच्छी तरह अपने बच्चों के समान ही करते थे। उन्होंने जैसे परिश्रम और सलंग्नता से कार्य करके इस संस्था का निर्माण और विकास किया उसकी कल्पना भी हम लोग नहीं कर सकते।

मातृ-भाषा का माध्यम

गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली की मुख्य विशेषता यह थी कि वहां वेद ज्ञान के अतिरिक्त और सब विषय विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र आदि भी पढ़ाए जाते थे। पर उन सबका माध्यम हिंदी को ही रखा गया। स्वामी श्रद्धानंद ने मातृभाषा द्वारा शिक्षा देने के महत्व को समझा और गुरुकुल में ही उसका क्रियात्मक रूप से परीक्षण उन्होंने किया। गुरुकुल के स्नातकों ने अनेक ऐतिहासिक,दार्शनिक और वैज्ञानिक विषयों पर मौलिक ग्रंथ लिखे। पारिभाषिक शब्दों का निर्माण किया ,बड़े-बड़े विश्वविद्यालय के संस्थापकों के दिमाग में इस बात को दूर कर दिया की हिंदी भाषा के माध्यम से उच्च विज्ञान की शिक्षा नहीं दी जा सकती। तत्कालीन कोलकाता विश्वविद्यालय आयोग के प्रधान मिस्टर सैडलर ने स्वीकार किया  - *"मातृ-भाषा द्वारा शिक्षा देने के प्रशिक्षण में गुरुकुल को अभूतपूर्व  सफलता मिली।"

विदेशी सरकार की आशंका

पर जहां एक ओर श्रद्धानंद जी के इस भारतीयता- जातीयता के रक्षक प्रयोग को सभी देश प्रेमी आशा भरी निगाहों से देख रहे थे ,भारत की विदेशी अंग्रेजी सरकार के पेट में भय के कारण चूहे कूदने लगे। *गुरुकुल की स्थापना के कुछ वर्ष बाद ही अंग्रेजी सरकार की गुप्त रिपोर्ट में लिखा गया था -* "आर्य समाज के संगठन में अभी जो महत्वपूर्ण विकास हुआ है, वह वास्तव में सरकार के लिए बड़े संकट का स्रोत है। यह विकास है - गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली। सरकार के लिए सबसे अधिक विचारणीय प्रश्न यह है कि इस समय आर्य समाज के गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने वाले उपदेशकों का, शिक्षा समाप्त करने के बाद सरकार के प्रति क्या रुख होगा ? इस समय के उपदेशको की अपेक्षा वे किसी और ही ढांचे में ढले हुए होंगे । जिस धर्म का वे प्रचार करेंगे, उसका आधार व्यक्तिगत 'विश्वास' और 'श्रद्धा' होगी ,जिसका जनता पर सहज में बहुत प्रभाव पड़ेगा। उनके प्रचार में संदेह, समझौता और भय की गंध भी न होगी और सर्वसाधारण के हृदय में उसका सीधा असर पड़ेगा।" 

गुरुकुल के एक अधिकारी का कथन है कि - "गुरुकुल की शिक्षा सर्वांश में राष्ट्रीय है। यहां इतिहास इस प्रकार पढ़ाया जाता है, जिससे ब्रह्मचारियों में देशभक्ति की भावना उद्दीप्त हो । इसमें कुछ भी संदेह नहीं की गुरुकुल में यत्न पूर्वक ऐसे राजनीतिक संन्यासियों का दल तैयार किया जा रहा है, जिनका मिशन सरकार के अस्तित्व के लिए भयानक संकट पैदा कर देगा।"

समाज सुधार के क्षेत्र में

गुरुकुल ने भारतीय समाज सुधार के क्षेत्र में भी अप्रत्यक्ष रीति से जो महत्वपूर्ण कार्य किया था। उस पर प्रकाश डालते हुए सन 1914 ईस्वी में ही लंदन के 'न्यू स्टेट्समैन' पत्र ने लिखा था -

" हरिद्वार का गुरुकुल संभवत: संसार के शिक्षा क्षेत्र में सबसे अधिक मनोरंजक परीक्षण है। गंगा के मनोहर दृश्य के बीच, हिमालय की हिमाच्छादित चोटियों के नीचे, सांसारिक वातावरण से बहुत दूर एक आश्रम बना हुआ है। केवल जीवन निर्वाह पर आचार्य,उपाध्याय और सब अध्यापक काम करते हुए गरीबी का जीवन बिताते हैं। यधपि  उनमें से बहुत से बाल बच्चों वाले गृहस्थी हैं, 7 वर्ष की आयु में यहां प्रवेश होता है और 25 वर्ष की आयु तक रखा जाता है। वे बीच में एक बार भी घर नहीं जा सकते ,न कभी किसी स्त्री के साथ रह सकते हैं। वे दिन- रात अपने अध्यापकों के निरीक्षण और संगति में रहते हैं। 25 वर्ष की आयु में समझा जाता है कि वे देश के पूरे सेवक बन गए। भारतीय दृष्टिकोण से उस संस्था की सबसे बड़ी विशेषता जाति-पाति के भेदभाव को मिटाना है। वहां 300 बालकों में ब्राह्मण से लेकर अछूतों तक सभी जातियों के बालक हैं। सबका एकसा जीवन और एक सा रहन-सहन है। पश्चिम की शिक्षा और आदर्शों के सहारे भी उसकी जड़ों को खोदना कठिन है परंतु वहां गुरुकुल में उसकी जड़ें बहुत बड़ी सफलता के साथ काट दी गई है। यह कार्य पूर्व के प्राचीन और सुंदर आदर्श को पुनर्जीवित करने की दृष्टि से ही किया जा रहा है।"

पंजाब में हिंदू संस्कृति और हिंदी की रक्षा

पंजाब की काया पलट करके उसमें जातीयता और धार्मिकता की भावना को जागृत करने का श्रेय बहुत कुछ श्रद्धानंद जी को ही है। क्योंकि पिछले ढाई हजार वर्षों में यूनानियों से लेकर पठानों ,मुगलों तक के हमले का पहली बार पंजाब को ही झेलना पड़ा था। भारत के भाग्य का निर्णय करने वाले पानीपत के तीनों युद्ध उसी की भूमि पर लड़े गए और पठान तथा मुगल शासन का दौरा-दौरा वहीं पर पड़ा। इन सब प्रहारों ने पंजाबियों को सुदृण  और संघर्षील तो बना ही दिया,पर विद्यर्मियों के साथ रहने से भारतीय सभ्यता और संस्कृति को वे बहुत कुछ भूल भी गए। अंग्रेजों ने इस तत्व को पहचाना और पंजाबियों को अपने साथ लेकर मिलाकर रखा। खासकर 1857 की  क्रान्ति में पंजाब की सेना ने इस प्रकार अंग्रेजों की सहायता की और उनके डगमगाती हुई राज्य को बचाया था। इसलिए वे लोग बड़े प्रसन्न थे, वहां अंग्रेजीयत ,ईर्साइयत और फैशन परस्ती आदि को बढ़ावा देते रहे । जिससे वहां के युवक सांसारिक भोग विलास की तरफ आकर्षित बनी रहे और इसकी पूर्ति के लिए अंग्रेजों की नौकरी करके उनके राज्य को मजबूत बनाते रहे। पंजाब में भारतीयता के अभाव का एक बड़ा कारण वहां की जन भाषा उर्दू हो गई थी, और वे लोग हिंदी से प्राय: अपरिचित थे। जैसा हम जानते हैं की भाषा और संस्कृति का बड़ा संबंध है । भाषा के माध्यम से ही हमारे विचार तथा भावनाएं दृढ़ बनती हैं ; जो लोग -उर्दू फारसी पढ़ कर उन भाषाओं के साहित्य में वर्णित भावों तथा कथाओं आदि की चर्चा करते रहते हैं। उनके विचारों और भावों में कितना अंतर होता है। इसकी झलक महाकवि की इन दो चार पंक्तियां में मिलती है- 

" भीम अर्जुन की जगह पर गैव रुस्तम को बिठा ।
 सभ्य लोगों में नहीं दृग आप सकते हैं उठा।कर्ण की ऊंची जगह जो हाथ हातिम के चढ़ी।तो समझ लो ढ़ह पड़ेगी आपकी गौरव गढी । क्या हसन की मसनवी पर आप होकर मुग्ध मन।फेंक देंगे हाथ से वह दिव्य रामायण रतन।।अतः स्वामी श्रद्धानंद  ने अपना निवास स्थान जालंधर में ही बनाकर प्रचार कार्य प्रारंभ किया । इसके लिए उच्च पदस्थ और प्रसिद्ध व्यक्ति होते हुए भी उन्होंने कैसे-कैसे अति सामान्य तरीके अपनाए। इसका वर्णन आफ्रिका निवासी भक्तराम शर्मा ने अपने अनुभवों में लिखा है - "महात्मा मुंशीराम ( श्रद्धानंद ) वर्षों तक इकतारा बजाकर प्रातःकाल जालंधर की गलियों में भजनों व दोहों द्वारा प्रचार करते रहे। लोग उन्हें भिकारी समझकर कुछ देवियां अन्न- वस्त्र दे देती तो वह उसे लाकर आर्य समाज में जमा कर देते थे। यह याद रखना चाहिए कि जालंधर में ही उनकी ससुराल थी, पर उन्होंने कभी झूठी लज्जा अनुभव नहीं की।  है किसी को प्रचार की ऐसी लगन ? "समाज सेवा के क्षेत्र में पदार्पण करने वालों के लिए स्वामी श्रद्धानंद जी का आदर्श नि:सन्देह बड़ा प्रेरणात्मक है।

देश के स्वाधीनता आंदोलन में

 उस समय पंजाब में सर सैयद अहमद खा मुसलमानो के नाम पर कांग्रेस का विरोध कर रहे थे। इसलिए जालंधर के मुसलमान ने अपने यहां कांग्रेस कमेटी को रोकने की कोशिश की और कई प्रकार से उसका विरोध किया। पर धुन के पक्के श्रद्धानंद जी ऐसे विघ्नों की कब परवाह करते थे। उन्होंने वहां कांग्रेस कमेटी का काम धूमधाम से चला कर दिखा ही दिया।
उस समय कांग्रेस का कार्य उन्हीं के साथी आर्य समाज के नेता लाला लाजपत राय जी के हिस्से में चला गया और जानकार लोगों की सम्मति है कि- " लाला लाजपत राय की अंग्रेजों को हटाने का उद्देश्य सामने रखा और श्रद्धानंद जी ने अंग्रेजियत को मिटाने के उद्देश्य को अपनाया।"

स्वामी जी के शेर दिली, अग्रणी कुशल नेतृत्व, राष्ट्रभक्ति और उदार हृदयता से अंग्रेजों का सामना करने के कारण दिल्ली में प्रसिद्धि इतनी बढ़ गई की स्वामी जी को दिल्ली की प्रसिद्ध जामा मस्जिद में भाषण करने को बुलाया गया । वह अद्भुत दृश्य था जब एक आर्य संन्यासी ने गेरुआ वस्त्र धारण किए हुए जामा मस्जिद के मुंबर( इमाम के स्थान पर) खड़े होकर " त्वं हि न: पिता वसो त्वं माता "वाला ऋग्वेद का मंत्र बोलकर मुसलमानो को समझाया - " धर्म प्रेम और उदारता की शिक्षा देता है ,छोटी-छोटी बातों पर हठ  करना नासमझी है।"इस प्रकार सब दूर दिल्ली में, खासकर मुसलमान के सर्वप्रधान धार्मिक स्थान में स्वामी श्रद्धानंद जी का भाषण जनता की स्मृति में अमिट बन गया ।
हिंदू संगठन और श्रद्धानंद जी

 इसमें संदेह नहीं की स्वामी श्रद्धानंद जी ने अपने दूरदर्शी विचारों और प्रयत्नो से कुछ ही समय में हिंदू जाति में एक ऐसी चैतन्यता उत्पन्न कर दी कि उसकी बहुत सी निर्बलता दूर हो गई और वह अनेक क्षेत्रों में प्रगति करके समग्र राष्ट्र का हित साधन करने में समर्थ हुई।

क्रमशः ....
भारतीय संस्कृति के महान संरक्षक : स्वामी श्रद्धानंद-१-डॉ. नितिन सहारिया, महाकौशल भारतीय संस्कृति के महान संरक्षक : स्वामी श्रद्धानंद-१-डॉ. नितिन सहारिया, महाकौशल Reviewed by dainik madhur india on 10:20 AM Rating: 5

*नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय हुए शामिल* *सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा*

*नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय हुए शामिल*

*सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा*

स्थानीय संपादक रायपुर रेखा चौधरी




रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज जशपुर प्रवास के दौरान दुलदुला विकास खंड के ग्राम सिरीमकेला स्थित श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के पावन प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देवाधिदेव महादेव से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के एक दिन पूर्व आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन को उन्होंने श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया। 




मुख्यमंत्री श्री साय ने ग्राम सिरीमकेला में सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि इससे स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक आयोजनों के लिए सुदृढ़ आधार मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कल हम सब महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएंगे और इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि सिरीमकेला में भक्तों और अपने परिवारजनों के बीच आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति हो रही है। भक्ति और श्रद्धा के इस अनूठे आयोजन में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन परंपरा को पुनर्स्थापित करते हुए अयोध्या धाम दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्राएँ करा रही है। श्रवण कुमार के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करते हुए अब तक प्रदेश के 42 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों को श्रीरामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं। 

उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या धाम में श्री रामलला का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज ध्वज लहरा रहा है। प्रत्येक राम भक्त की आस्था 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही — यह एक ऐसा यज्ञ था जिसकी लौ कभी नहीं डगमगाई। हम सब निमित्त मात्र हैं, जो अपने भांचा राम के दर्शन उनके भव्य मंदिर में कर रहे हैं और श्रद्धालुओं को करा पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नीलकंठेश्वर महादेव का दर्शन पाकर वे स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। दशहरा पर्व के दिन नीलकंठ के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और आज प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत यहाँ निरंतर दर्शन लाभ मिलना हम सबके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जशपुर में मधेश्वर महादेव स्थित हैं, जिसे लोक मान्यता के अनुसार एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहा जाता है। सनातन परंपरा में भक्ति का विशेष महत्व है और राज्य सरकार भक्तों का सम्मान करती है। सावन माह में भोरमदेव मंदिर में कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर हर वर्ष आस्था प्रकट की जाती है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम त्रिवेणी संगम में इन दिनों राजिम कुंभ कल्प का भव्य आयोजन हो रहा है, जहाँ आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राजिम कुंभ कल्प की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया गया है, ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की पहचान देश-विदेश तक है तथा छत्तीसगढ़ के पाँच शक्ति पीठों के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर सतत कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। 

कार्यक्रम के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के इस पावन कालखंड में नीलकंठेश्वर महादेव की कृपा हम सभी पर बनी रहे, प्रदेश में सुख-शांति, समृद्धि और विकास की नई धाराएँ प्रवाहित हों तथा छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव के साथ निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर रहे — यही उनकी हार्दिक कामना है।

इस अवसर पर सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, महासमुंद विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व राज्यसभा सांसद श्री रणविजय सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुशीला साय, श्री कृष्णा राय, श्री पवन साय, श्री भरत सिंह, श्री अरविन्द प्रसाद साय, श्री कपिल देव साय, सरगुजा आईजी श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार तथा महादेव मंदिर समिति के सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
*नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय हुए शामिल* *सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा* *नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय हुए शामिल*  *सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा* Reviewed by dainik madhur india on 4:55 AM Rating: 5

रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की बड़ी कार्रवाई : 25 लाख रुपये मूल्य का पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार जब्त*


*रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की बड़ी कार्रवाई : 25 लाख रुपये मूल्य का पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार जब्त*

स्थानीय संपादक रायपुर रेखा चौधरी




रायपुर, । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन एवं खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक श्री दीपक कुमार अग्रवाल व कलेक्टर डॉ गौरव सिंह निर्देशानुसार प्राप्त सूचना के आधार पर 11 फरवरी की मध्य रात्रि में रायपुर में बड़ी कार्रवाई की गई। खाद्य सुरक्षा टीम ने ट्रांसपोर्ट नगर, रावांभाटा स्थित मउरानीपुर लॉजिस्टिक प्रा. लि., पार्किंग नंबर 09 में दबिश देकर 170 बोरियों में रखे लगभग 5,950 किलोग्राम पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार को जब्त किया। जब्त सामग्री का अनुमानित मूल्य लगभग 25 लाख रुपये बताया गया है।




प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उक्त माल का परिवहन, विक्रय एवं भंडारण किशन यादव एवं रामभरोसे यादव द्वारा किया जा रहा था। मौके पर उपस्थित प्रभारी शिवम यादव एवं श्री सतगुरूशरन यादव से पूछताछ की गई तथा पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार का एक नमूना संग्रहित कर परीक्षण हेतु प्रयोगशाला भेजा गया है।

इस कार्रवाई के दौरान अभिहित अधिकारी श्री विनोद कुमार गुप्ता, खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री संतोष कुमार ध्रुव, नमूना सहायक श्री राकेश गिदौडे तथा सीएसपी उरला श्रीमती पूर्णिमा लामा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की बड़ी कार्रवाई : 25 लाख रुपये मूल्य का पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार जब्त* रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की बड़ी कार्रवाई : 25 लाख रुपये मूल्य का पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार जब्त* Reviewed by dainik madhur india on 12:48 AM Rating: 5

राष्ट्रीय दैनिक मधुर इंडिया 8 राज्यों में बढते कदम दैनिक अखबार मासिक पत्रिका यूट्यूब चैनल वेबपोर्टल

राष्ट्रीय दैनिक मधुर इंडिया 8 राज्यों में बढते कदम दैनिक अखबार मासिक पत्रिका यूट्यूब चैनल वेबपोर्टल
भारत देश में कही भी पत्रकारिता करने हेतु संपर्क करे संपादक प्रदीप मिश्रा-8770089979
Powered by Blogger.