भारतीय संस्कृति के महान संरक्षक : स्वामी श्रद्धानंद-१-डॉ. नितिन सहारिया, महाकौशल

भारतीय संस्कृति के महान संरक्षक : स्वामी श्रद्धानंद-१-डॉ. नितिन सहारिया, महाकौशल


सन 1898 की बात है 'आर्य प्रतिनिधि सभा' पंजाब ने धर्म और जातियता ( हिंदु/आर्य धर्म ) की शिक्षा देने के लिए भारतवर्ष के प्राचीन आदर्श ऋषि परंपरा पर एक 'गुरुकुल' खोलने का प्रस्ताव पास किया। सभा में वक्ताओं ने कहा - " अंग्रेजी ढंग की विदेशी शिक्षा के प्रभाव से नवयुवकों में से अपने धर्म और संस्कृति की भावना दिन पर दिन घटती जाती है, वे विदेशी सभ्यता की तरफ आकर्षित होते जाते हैं।  यदि इस पतनोंन्मुख प्रवाह को रोकना है तो वैदिक सिद्धांतों के अनुकूल एक आदर्श शिक्षण संस्था की स्थापना आवश्यक है।" प्रस्ताव तो पास कर दिया गया और ऐसे गुरुकुल के लिए धन और विद्यार्थी प्राप्त करना सहज न था। उस समय तक लोगों ने गुरुकुल का नाम भी न सुना था। जब उनको प्राचीन शास्त्रों में वर्णित ऋषि मुनियों के उन गुरुकुलों का वर्णन सुनाया जाता था, जिनमें विद्यार्थी ब्रह्मचारी बनकर अपने निर्वाह की व्यवस्था स्वयं करके 18 -20 वर्ष तक वेदादि विधाओं का अध्ययन करते थे और उतने समय तक गुरुओं के आश्रम में ही रहते थे, तो लोग आश्चर्य करने लगते थे। वे हंसकर कहते-  श्रीमान जी! इस अंग्रेजी शिक्षा के जमाने में कौन 10 -20 वर्ष तक सिर मुड़ा कर जंगलों में रहेगा और संस्कृत जैसी 'मृत -भाषा' को पढ़ेगा।पर 'आर्य प्रतिनिधि सभा' के अध्यक्ष लाला मुंशीराम जी (1856 से 1926 ,बाद में स्वामी श्रद्धानंद के नाम से विख्यात) जिन्होंने इस प्रस्ताव को पास कराया था ,दूसरी धातु के बने मनुष्य थे। वे इस योजना में आने वाली महान कठिनाइयों और लोगों की उदासीनता की बात को अच्छी तरह समझते थे। इसलिए प्रस्ताव के पास होते ही सभा स्थल पर उन्होंने यह प्रतिज्ञा की कि- *"जब तक मैं गुरुकुल के लिए ₹30000 इकट्ठा न कर लूंगा घर में पैर न रखूंगा।"यह एक ऐसे व्यक्ति की प्रतिज्ञा थी जिसे अपने सिद्धांतों और आत्म शक्ति पर अटल श्रद्धा थी। बस वे अपना काम- धाम छोड़कर भारत के अनेक शहरों का दौरा करने लगी और डेढ़ वर्ष में 30000 की बजाय ₹40000 एकत्रित करके दिखा दिया। इसके बाद गुरुकुल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की समस्या सामने आई ,तो उन्होंने सबसे पहले अपने दोनों पुत्रों इंद्र और हरिश्चंद्र को उसमें दाखिल किया। फिर अपने खास मित्रों के 10- 15 बच्चों को इकट्ठा किया। *हरिद्वार में कनखल के पास हिमालय की तराई में 'कांगड़ी' नाम का गांव दान में प्राप्त करके वहीं 'गुरुकुल' की स्थापना की गई।* आज तो गुरुकुल मामूली सी बात बन गई है और छोटी-छोटी जातियों ने अपने गुरुकुल नामदानी स्वतंत्र संस्थाएं शहरों में ही खोली हैं। पर आज से लगभग 125 वर्ष पूर्व एक जंगली स्थान में जहां अक्सर बाघ, जंगली हाथी घूमा करते थे। छोटे बालकों का उत्तरदायित्व ग्रहण करके कोई शिक्षण संस्था खोलना साधारण साहस का काम ना था। पर *मुंशीराम ( श्रद्धानंद) जी इतने कर्तव्य परायण और सेवाभावी थे कि आरंभ से ही सभी बच्चों की देख-भाल अच्छी तरह अपने बच्चों के समान ही करते थे। उन्होंने जैसे परिश्रम और सलंग्नता से कार्य करके इस संस्था का निर्माण और विकास किया उसकी कल्पना भी हम लोग नहीं कर सकते।

मातृ-भाषा का माध्यम

गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली की मुख्य विशेषता यह थी कि वहां वेद ज्ञान के अतिरिक्त और सब विषय विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र आदि भी पढ़ाए जाते थे। पर उन सबका माध्यम हिंदी को ही रखा गया। स्वामी श्रद्धानंद ने मातृभाषा द्वारा शिक्षा देने के महत्व को समझा और गुरुकुल में ही उसका क्रियात्मक रूप से परीक्षण उन्होंने किया। गुरुकुल के स्नातकों ने अनेक ऐतिहासिक,दार्शनिक और वैज्ञानिक विषयों पर मौलिक ग्रंथ लिखे। पारिभाषिक शब्दों का निर्माण किया ,बड़े-बड़े विश्वविद्यालय के संस्थापकों के दिमाग में इस बात को दूर कर दिया की हिंदी भाषा के माध्यम से उच्च विज्ञान की शिक्षा नहीं दी जा सकती। तत्कालीन कोलकाता विश्वविद्यालय आयोग के प्रधान मिस्टर सैडलर ने स्वीकार किया  - *"मातृ-भाषा द्वारा शिक्षा देने के प्रशिक्षण में गुरुकुल को अभूतपूर्व  सफलता मिली।"

विदेशी सरकार की आशंका

पर जहां एक ओर श्रद्धानंद जी के इस भारतीयता- जातीयता के रक्षक प्रयोग को सभी देश प्रेमी आशा भरी निगाहों से देख रहे थे ,भारत की विदेशी अंग्रेजी सरकार के पेट में भय के कारण चूहे कूदने लगे। *गुरुकुल की स्थापना के कुछ वर्ष बाद ही अंग्रेजी सरकार की गुप्त रिपोर्ट में लिखा गया था -* "आर्य समाज के संगठन में अभी जो महत्वपूर्ण विकास हुआ है, वह वास्तव में सरकार के लिए बड़े संकट का स्रोत है। यह विकास है - गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली। सरकार के लिए सबसे अधिक विचारणीय प्रश्न यह है कि इस समय आर्य समाज के गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने वाले उपदेशकों का, शिक्षा समाप्त करने के बाद सरकार के प्रति क्या रुख होगा ? इस समय के उपदेशको की अपेक्षा वे किसी और ही ढांचे में ढले हुए होंगे । जिस धर्म का वे प्रचार करेंगे, उसका आधार व्यक्तिगत 'विश्वास' और 'श्रद्धा' होगी ,जिसका जनता पर सहज में बहुत प्रभाव पड़ेगा। उनके प्रचार में संदेह, समझौता और भय की गंध भी न होगी और सर्वसाधारण के हृदय में उसका सीधा असर पड़ेगा।" 

गुरुकुल के एक अधिकारी का कथन है कि - "गुरुकुल की शिक्षा सर्वांश में राष्ट्रीय है। यहां इतिहास इस प्रकार पढ़ाया जाता है, जिससे ब्रह्मचारियों में देशभक्ति की भावना उद्दीप्त हो । इसमें कुछ भी संदेह नहीं की गुरुकुल में यत्न पूर्वक ऐसे राजनीतिक संन्यासियों का दल तैयार किया जा रहा है, जिनका मिशन सरकार के अस्तित्व के लिए भयानक संकट पैदा कर देगा।"

समाज सुधार के क्षेत्र में

गुरुकुल ने भारतीय समाज सुधार के क्षेत्र में भी अप्रत्यक्ष रीति से जो महत्वपूर्ण कार्य किया था। उस पर प्रकाश डालते हुए सन 1914 ईस्वी में ही लंदन के 'न्यू स्टेट्समैन' पत्र ने लिखा था -

" हरिद्वार का गुरुकुल संभवत: संसार के शिक्षा क्षेत्र में सबसे अधिक मनोरंजक परीक्षण है। गंगा के मनोहर दृश्य के बीच, हिमालय की हिमाच्छादित चोटियों के नीचे, सांसारिक वातावरण से बहुत दूर एक आश्रम बना हुआ है। केवल जीवन निर्वाह पर आचार्य,उपाध्याय और सब अध्यापक काम करते हुए गरीबी का जीवन बिताते हैं। यधपि  उनमें से बहुत से बाल बच्चों वाले गृहस्थी हैं, 7 वर्ष की आयु में यहां प्रवेश होता है और 25 वर्ष की आयु तक रखा जाता है। वे बीच में एक बार भी घर नहीं जा सकते ,न कभी किसी स्त्री के साथ रह सकते हैं। वे दिन- रात अपने अध्यापकों के निरीक्षण और संगति में रहते हैं। 25 वर्ष की आयु में समझा जाता है कि वे देश के पूरे सेवक बन गए। भारतीय दृष्टिकोण से उस संस्था की सबसे बड़ी विशेषता जाति-पाति के भेदभाव को मिटाना है। वहां 300 बालकों में ब्राह्मण से लेकर अछूतों तक सभी जातियों के बालक हैं। सबका एकसा जीवन और एक सा रहन-सहन है। पश्चिम की शिक्षा और आदर्शों के सहारे भी उसकी जड़ों को खोदना कठिन है परंतु वहां गुरुकुल में उसकी जड़ें बहुत बड़ी सफलता के साथ काट दी गई है। यह कार्य पूर्व के प्राचीन और सुंदर आदर्श को पुनर्जीवित करने की दृष्टि से ही किया जा रहा है।"

पंजाब में हिंदू संस्कृति और हिंदी की रक्षा

पंजाब की काया पलट करके उसमें जातीयता और धार्मिकता की भावना को जागृत करने का श्रेय बहुत कुछ श्रद्धानंद जी को ही है। क्योंकि पिछले ढाई हजार वर्षों में यूनानियों से लेकर पठानों ,मुगलों तक के हमले का पहली बार पंजाब को ही झेलना पड़ा था। भारत के भाग्य का निर्णय करने वाले पानीपत के तीनों युद्ध उसी की भूमि पर लड़े गए और पठान तथा मुगल शासन का दौरा-दौरा वहीं पर पड़ा। इन सब प्रहारों ने पंजाबियों को सुदृण  और संघर्षील तो बना ही दिया,पर विद्यर्मियों के साथ रहने से भारतीय सभ्यता और संस्कृति को वे बहुत कुछ भूल भी गए। अंग्रेजों ने इस तत्व को पहचाना और पंजाबियों को अपने साथ लेकर मिलाकर रखा। खासकर 1857 की  क्रान्ति में पंजाब की सेना ने इस प्रकार अंग्रेजों की सहायता की और उनके डगमगाती हुई राज्य को बचाया था। इसलिए वे लोग बड़े प्रसन्न थे, वहां अंग्रेजीयत ,ईर्साइयत और फैशन परस्ती आदि को बढ़ावा देते रहे । जिससे वहां के युवक सांसारिक भोग विलास की तरफ आकर्षित बनी रहे और इसकी पूर्ति के लिए अंग्रेजों की नौकरी करके उनके राज्य को मजबूत बनाते रहे। पंजाब में भारतीयता के अभाव का एक बड़ा कारण वहां की जन भाषा उर्दू हो गई थी, और वे लोग हिंदी से प्राय: अपरिचित थे। जैसा हम जानते हैं की भाषा और संस्कृति का बड़ा संबंध है । भाषा के माध्यम से ही हमारे विचार तथा भावनाएं दृढ़ बनती हैं ; जो लोग -उर्दू फारसी पढ़ कर उन भाषाओं के साहित्य में वर्णित भावों तथा कथाओं आदि की चर्चा करते रहते हैं। उनके विचारों और भावों में कितना अंतर होता है। इसकी झलक महाकवि की इन दो चार पंक्तियां में मिलती है- 

" भीम अर्जुन की जगह पर गैव रुस्तम को बिठा ।
 सभ्य लोगों में नहीं दृग आप सकते हैं उठा।कर्ण की ऊंची जगह जो हाथ हातिम के चढ़ी।तो समझ लो ढ़ह पड़ेगी आपकी गौरव गढी । क्या हसन की मसनवी पर आप होकर मुग्ध मन।फेंक देंगे हाथ से वह दिव्य रामायण रतन।।अतः स्वामी श्रद्धानंद  ने अपना निवास स्थान जालंधर में ही बनाकर प्रचार कार्य प्रारंभ किया । इसके लिए उच्च पदस्थ और प्रसिद्ध व्यक्ति होते हुए भी उन्होंने कैसे-कैसे अति सामान्य तरीके अपनाए। इसका वर्णन आफ्रिका निवासी भक्तराम शर्मा ने अपने अनुभवों में लिखा है - "महात्मा मुंशीराम ( श्रद्धानंद ) वर्षों तक इकतारा बजाकर प्रातःकाल जालंधर की गलियों में भजनों व दोहों द्वारा प्रचार करते रहे। लोग उन्हें भिकारी समझकर कुछ देवियां अन्न- वस्त्र दे देती तो वह उसे लाकर आर्य समाज में जमा कर देते थे। यह याद रखना चाहिए कि जालंधर में ही उनकी ससुराल थी, पर उन्होंने कभी झूठी लज्जा अनुभव नहीं की।  है किसी को प्रचार की ऐसी लगन ? "समाज सेवा के क्षेत्र में पदार्पण करने वालों के लिए स्वामी श्रद्धानंद जी का आदर्श नि:सन्देह बड़ा प्रेरणात्मक है।

देश के स्वाधीनता आंदोलन में

 उस समय पंजाब में सर सैयद अहमद खा मुसलमानो के नाम पर कांग्रेस का विरोध कर रहे थे। इसलिए जालंधर के मुसलमान ने अपने यहां कांग्रेस कमेटी को रोकने की कोशिश की और कई प्रकार से उसका विरोध किया। पर धुन के पक्के श्रद्धानंद जी ऐसे विघ्नों की कब परवाह करते थे। उन्होंने वहां कांग्रेस कमेटी का काम धूमधाम से चला कर दिखा ही दिया।
उस समय कांग्रेस का कार्य उन्हीं के साथी आर्य समाज के नेता लाला लाजपत राय जी के हिस्से में चला गया और जानकार लोगों की सम्मति है कि- " लाला लाजपत राय की अंग्रेजों को हटाने का उद्देश्य सामने रखा और श्रद्धानंद जी ने अंग्रेजियत को मिटाने के उद्देश्य को अपनाया।"

स्वामी जी के शेर दिली, अग्रणी कुशल नेतृत्व, राष्ट्रभक्ति और उदार हृदयता से अंग्रेजों का सामना करने के कारण दिल्ली में प्रसिद्धि इतनी बढ़ गई की स्वामी जी को दिल्ली की प्रसिद्ध जामा मस्जिद में भाषण करने को बुलाया गया । वह अद्भुत दृश्य था जब एक आर्य संन्यासी ने गेरुआ वस्त्र धारण किए हुए जामा मस्जिद के मुंबर( इमाम के स्थान पर) खड़े होकर " त्वं हि न: पिता वसो त्वं माता "वाला ऋग्वेद का मंत्र बोलकर मुसलमानो को समझाया - " धर्म प्रेम और उदारता की शिक्षा देता है ,छोटी-छोटी बातों पर हठ  करना नासमझी है।"इस प्रकार सब दूर दिल्ली में, खासकर मुसलमान के सर्वप्रधान धार्मिक स्थान में स्वामी श्रद्धानंद जी का भाषण जनता की स्मृति में अमिट बन गया ।
हिंदू संगठन और श्रद्धानंद जी

 इसमें संदेह नहीं की स्वामी श्रद्धानंद जी ने अपने दूरदर्शी विचारों और प्रयत्नो से कुछ ही समय में हिंदू जाति में एक ऐसी चैतन्यता उत्पन्न कर दी कि उसकी बहुत सी निर्बलता दूर हो गई और वह अनेक क्षेत्रों में प्रगति करके समग्र राष्ट्र का हित साधन करने में समर्थ हुई।

क्रमशः ....
भारतीय संस्कृति के महान संरक्षक : स्वामी श्रद्धानंद-१-डॉ. नितिन सहारिया, महाकौशल भारतीय संस्कृति के महान संरक्षक : स्वामी श्रद्धानंद-१-डॉ. नितिन सहारिया, महाकौशल Reviewed by dainik madhur india on 10:20 AM Rating: 5

*नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय हुए शामिल* *सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा*

*नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय हुए शामिल*

*सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा*

स्थानीय संपादक रायपुर रेखा चौधरी




रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज जशपुर प्रवास के दौरान दुलदुला विकास खंड के ग्राम सिरीमकेला स्थित श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के पावन प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देवाधिदेव महादेव से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के एक दिन पूर्व आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन को उन्होंने श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया। 




मुख्यमंत्री श्री साय ने ग्राम सिरीमकेला में सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि इससे स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक आयोजनों के लिए सुदृढ़ आधार मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कल हम सब महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएंगे और इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि सिरीमकेला में भक्तों और अपने परिवारजनों के बीच आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति हो रही है। भक्ति और श्रद्धा के इस अनूठे आयोजन में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन परंपरा को पुनर्स्थापित करते हुए अयोध्या धाम दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्राएँ करा रही है। श्रवण कुमार के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करते हुए अब तक प्रदेश के 42 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों को श्रीरामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं। 

उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या धाम में श्री रामलला का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज ध्वज लहरा रहा है। प्रत्येक राम भक्त की आस्था 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही — यह एक ऐसा यज्ञ था जिसकी लौ कभी नहीं डगमगाई। हम सब निमित्त मात्र हैं, जो अपने भांचा राम के दर्शन उनके भव्य मंदिर में कर रहे हैं और श्रद्धालुओं को करा पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नीलकंठेश्वर महादेव का दर्शन पाकर वे स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। दशहरा पर्व के दिन नीलकंठ के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और आज प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत यहाँ निरंतर दर्शन लाभ मिलना हम सबके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जशपुर में मधेश्वर महादेव स्थित हैं, जिसे लोक मान्यता के अनुसार एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहा जाता है। सनातन परंपरा में भक्ति का विशेष महत्व है और राज्य सरकार भक्तों का सम्मान करती है। सावन माह में भोरमदेव मंदिर में कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर हर वर्ष आस्था प्रकट की जाती है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम त्रिवेणी संगम में इन दिनों राजिम कुंभ कल्प का भव्य आयोजन हो रहा है, जहाँ आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राजिम कुंभ कल्प की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया गया है, ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की पहचान देश-विदेश तक है तथा छत्तीसगढ़ के पाँच शक्ति पीठों के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर सतत कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। 

कार्यक्रम के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के इस पावन कालखंड में नीलकंठेश्वर महादेव की कृपा हम सभी पर बनी रहे, प्रदेश में सुख-शांति, समृद्धि और विकास की नई धाराएँ प्रवाहित हों तथा छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव के साथ निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर रहे — यही उनकी हार्दिक कामना है।

इस अवसर पर सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, महासमुंद विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व राज्यसभा सांसद श्री रणविजय सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुशीला साय, श्री कृष्णा राय, श्री पवन साय, श्री भरत सिंह, श्री अरविन्द प्रसाद साय, श्री कपिल देव साय, सरगुजा आईजी श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार तथा महादेव मंदिर समिति के सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
*नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय हुए शामिल* *सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा* *नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय हुए शामिल*  *सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा* Reviewed by dainik madhur india on 4:55 AM Rating: 5

रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की बड़ी कार्रवाई : 25 लाख रुपये मूल्य का पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार जब्त*


*रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की बड़ी कार्रवाई : 25 लाख रुपये मूल्य का पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार जब्त*

स्थानीय संपादक रायपुर रेखा चौधरी




रायपुर, । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन एवं खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक श्री दीपक कुमार अग्रवाल व कलेक्टर डॉ गौरव सिंह निर्देशानुसार प्राप्त सूचना के आधार पर 11 फरवरी की मध्य रात्रि में रायपुर में बड़ी कार्रवाई की गई। खाद्य सुरक्षा टीम ने ट्रांसपोर्ट नगर, रावांभाटा स्थित मउरानीपुर लॉजिस्टिक प्रा. लि., पार्किंग नंबर 09 में दबिश देकर 170 बोरियों में रखे लगभग 5,950 किलोग्राम पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार को जब्त किया। जब्त सामग्री का अनुमानित मूल्य लगभग 25 लाख रुपये बताया गया है।




प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उक्त माल का परिवहन, विक्रय एवं भंडारण किशन यादव एवं रामभरोसे यादव द्वारा किया जा रहा था। मौके पर उपस्थित प्रभारी शिवम यादव एवं श्री सतगुरूशरन यादव से पूछताछ की गई तथा पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार का एक नमूना संग्रहित कर परीक्षण हेतु प्रयोगशाला भेजा गया है।

इस कार्रवाई के दौरान अभिहित अधिकारी श्री विनोद कुमार गुप्ता, खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री संतोष कुमार ध्रुव, नमूना सहायक श्री राकेश गिदौडे तथा सीएसपी उरला श्रीमती पूर्णिमा लामा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की बड़ी कार्रवाई : 25 लाख रुपये मूल्य का पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार जब्त* रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की बड़ी कार्रवाई : 25 लाख रुपये मूल्य का पैक्ड सेफ्रॉन ब्लेंडेड सितार जब्त* Reviewed by dainik madhur india on 12:48 AM Rating: 5

प्रोजेक्ट धड़कन" के अंतर्गत बच्चों की हुई निःशुल्क हृदय जांच, 967 बच्चों की हुई स्क्रीनिंग*


*"प्रोजेक्ट धड़कन" के अंतर्गत  बच्चों की हुई निःशुल्क हृदय जांच, 967 बच्चों की हुई स्क्रीनिंग*




रायपुर, । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार, जिला प्रशासन रायपुर द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए चलाई जा रही योजना "प्रोजेक्ट धड़कन" के अंतर्गत ज़िले भर में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य है - बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की समय रहते पहचान कर उन्हें बेहतर और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना।




कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन तथा श्री सत्य साई हॉस्पिटल के सहयोग से आज धरसीवां टीम बी द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र 3 बोरियाकला में 134 बच्चों की स्क्रीनिंग, अर्बन टीम बी द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र खोखोपारा एवं अयोध्या नगर मठपुरैना में 130 बच्चों की स्क्रीनिंग, अर्बन टीम डी द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 2 एवं 17 बीरगांव में 129 बच्चों की स्क्रीनिंग, अभनपुर टीम बी द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 1,2,3 लमकेनी में 141 बच्चों की स्क्रीनिंग, अर्बन टीम ए द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र धर्म नगर, छत्तीसगढ़ नगर, सुदामा नगर में 167 बच्चों की स्क्रीनिंग, तिल्दा टीम बी द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र गनियारी, मटियाडीह, पीकारीडीह में 128 बच्चों की स्क्रीनिंग, आरंग टीम बी द्वारा शासकीय प्राथमिक शाला बाना में 138 बच्चों की स्क्रीनिंग, व पूरे जिले में आज कुल 967 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई।
प्रोजेक्ट धड़कन" के अंतर्गत बच्चों की हुई निःशुल्क हृदय जांच, 967 बच्चों की हुई स्क्रीनिंग* प्रोजेक्ट धड़कन" के अंतर्गत  बच्चों की हुई निःशुल्क हृदय जांच, 967 बच्चों की हुई स्क्रीनिंग* Reviewed by dainik madhur india on 12:43 AM Rating: 5

प्रोजेक्ट धड़कन* *नमन की खुशियों की चहचहाहट गूंज रही है रामसागर पारा की गलियों में* *नमन हृदय रोग से पूर्ण रूप से स्वस्थ : माता-पिता ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार* *जिला प्रशासन की पहल रंग लाई, हृदय रोग से जूझ रहे नमन की लौटी मुस्कान*


*प्रोजेक्ट धड़कन*

*नमन की खुशियों की चहचहाहट गूंज रही है रामसागर पारा की गलियों में*

*नमन हृदय रोग से पूर्ण रूप से स्वस्थ : माता-पिता ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार*

*जिला प्रशासन की पहल रंग लाई, हृदय रोग से जूझ रहे नमन की लौटी मुस्कान*

स्थानीय संपादक रायपुर रेखा चौधरी




रायपुर, । नमन अब मोहल्ले के अन्य बच्चों के साथ लुका-छुपी, क्रिकेट जैसे खेल खेल रहा है और शरारतें भी कर रहा है। उसकी किलकारियां और हंसी अब फिर से सुनाई दे रही हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब उसे किसी प्रकार की शारीरिक तकलीफ या सांस से जुड़ी कोई समस्या नहीं है। नमन पूर्ण रूप से स्वस्थ है और उसके माता-पिता विनोद एवं रोशनी के चेहरे पर अब चिंता का कोई भाव नहीं है।




यह सब संभव हुआ है प्रोजेक्ट धड़कन के माध्यम से, जिसके अंतर्गत नमन के हृदय रोग का निःशुल्क उपचार किया गया। यह प्रोजेक्ट विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में तथा कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की पहल और सत्य साईं हॉस्पिटल, नवा रायपुर के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।




नमन पीएम श्री आर.डी. तिवारी स्कूल में कक्षा चौथी का छात्र है और पढ़ाई में हमेशा से अच्छा रहा है। उसकी माता रोशनी बताती हैं कि नमन पढ़ाई में तो अच्छा था, लेकिन खेलते समय अक्सर हृदय में दर्द होने की शिकायत करता था। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य समझा, लेकिन एक दिन स्कूल से लौटने के बाद नमन ने बताया कि खेलते समय उसे सीने में तेज दर्द हुआ। इसके बाद परिवार चिंतित हो गया और उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। जांच के बाद विशेषज्ञों ने हृदय की विस्तृत जांच की सलाह दी।

प्रोजेक्ट धड़कन की टीम ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर नमन को सत्य साईं हॉस्पिटल, नवा रायपुर ले जाकर जांच कराई। जांच रिपोर्ट में उसके हृदय में छेद होने की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रोजेक्ट धड़कन की टीम ने तत्परता से उपचार की प्रक्रिया शुरू की और जल्द ही ऑपरेशन की तिथि निर्धारित की गई। नमन को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। दो-तीन दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और आज वह पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहा है।

नमन के पिता श्री विनोद कहते हैं कि जिला प्रशासन रायपुर का यह प्रोजेक्ट धड़कन, समाज के ऐसे बच्चों एवं परिजनों के लिए मददगार है जिन बच्चों को हार्ट के जन्मजात समस्या से गुजरना पड़ता हैं। मैं और मेरा पूरा परिवार इस संवेदनशील मदद के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति धन्यवाद देता हूं।
प्रोजेक्ट धड़कन* *नमन की खुशियों की चहचहाहट गूंज रही है रामसागर पारा की गलियों में* *नमन हृदय रोग से पूर्ण रूप से स्वस्थ : माता-पिता ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार* *जिला प्रशासन की पहल रंग लाई, हृदय रोग से जूझ रहे नमन की लौटी मुस्कान* प्रोजेक्ट धड़कन*  *नमन की खुशियों की चहचहाहट गूंज रही है रामसागर पारा की गलियों में*  *नमन हृदय रोग से पूर्ण रूप से स्वस्थ : माता-पिता ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार*  *जिला प्रशासन की पहल रंग लाई, हृदय रोग से जूझ रहे नमन की लौटी मुस्कान* Reviewed by dainik madhur india on 12:30 AM Rating: 5

धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित धरा को सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही हमारी सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय* *सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़, कहा - छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला* *“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान* *सिक्किम से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात* *मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसान हितैषी योजनाओं, उद्योग नीति तथा नक्सल पुनर्वास नीति को मिली सराहना*

*धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित धरा को सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही हमारी सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय*

*सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़, कहा - छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला*

*“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान*

*सिक्किम से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात*

*मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसान हितैषी योजनाओं, उद्योग नीति तथा नक्सल पुनर्वास नीति को मिली सराहना*

स्थानीय संपादक रेखा चौधरी रायपुर




रायपुर, // छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रदेश है और धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित इस धरा को हमारी सरकार सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में सिक्किम राज्य से अध्ययन भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों के दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया और उनसे छत्तीसगढ़ को लेकर ढेर सारी बातें साझा की। उन्होंने सभी अतिथियों को राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ में स्वागत और अभिवादन किया। मुख्यमंत्री की सहृदयता और आतिथ्य पाकर  सभी पत्रकार अभिभूत हुए और उन्हें सिक्किम आने का निमंत्रण भी दिया। 



             मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ 44 प्रतिशत वन क्षेत्र से आच्छादित है तथा यहां 31 प्रतिशत आदिवासी समुदाय निवासरत है। वनोपज संग्रहण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से जनजातीय समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। जशपुर जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाएं ‘जशप्योर’ ब्रांड के अंतर्गत उत्पाद तैयार कर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए सरकार द्वारा 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जा रहा है तथा चरण पादुका योजना के तहत निःशुल्क चप्पल प्रदान की जा रही है।
                मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह की चिंता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2005 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। हाल ही छह हजार से अधिक जोड़े इस योजना के अंतर्गत विवाह बंधन में बंधे, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत नवदंपतियों को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता एवं 15 हजार रुपये का सामग्री सहयोग प्रदान किया जाता है।
                   नक्सलवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सफल नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते प्रदेश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। राज्य सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की सहायता तथा तीन वर्षों तक प्रति माह 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। अब तक 2,500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। श्री साय ने बताया कि जगदलपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा ‘बस्तर पंडुम’ कैफे का सफल संचालन इसका सशक्त उदाहरण है।
          मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के अंतर्गत 17 शासकीय योजनाओं को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया गया है, जिससे सड़क, बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं। पर्यटन की संभावनाओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुम्बसर गुफाएं, अबूझमाड़ के वन और धुड़मारास जैसे स्थल प्रदेश की पहचान हैं। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु होम स्टे को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसके तहत ग्रामीणों को पांच कमरों तक निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं औद्योगिक विकास के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि नवा रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है, जहां निम्न आय वर्ग के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने प्रदेश की आकर्षक नवीन औद्योगिक नीति का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसके तहत राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। साथ ही चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना से प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। 

*“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – सुश्री अर्चना प्रधान*

सिक्किम की पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ‘मेक इन इंडिया’ का प्रभावी स्वरूप देखने को मिला। भिलाई स्टील प्लांट में रेल पटरियों सहित विभिन्न इस्पात उत्पादों का निर्माण प्रदेश के औद्योगिक सामर्थ्य को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इकाइयों को हमें करीब से देखने का मौका मिला और हम जान पाए है कि इस प्रदेश का देश के विकास में कितना महत्वपूर्ण योगदान है। 

    *सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़*

              मुख्यमंत्री से भ्रमण उपरांत मिलने पहुंचे पत्रकारों ने  कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला है। उन्होंने भ्रमण के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए स्थानीय खान-पान और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। सिक्किम से आए पत्रकारों ने अपने पांच दिवसीय भ्रमण के दौरान भिलाई स्टील प्लांट, गेवरा ओपन माइंस, नवा रायपुर तथा जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया। पत्रकारों ने बताया कि छत्तीसगढ़ भ्रमण की सुंदर स्मृतियों को अपने साथ लेकर जा रहे हैं, जो उन्हें आजीवन याद रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसानों के हित में की गई घोषणाओं, स्वच्छ वातावरण तथा पुनर्वास नीति की सराहना की।

*मुख्यमंत्री को भेंट किया सिक्किम का स्मृति चिन्ह ‘थांका’*

पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को सिक्किम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक ‘थांका’ पेंटिंग भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस उपहार के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसे स्नेह और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बताया।
        पत्रकारों ने बताया कि सिक्किम का थांका पेंटिंग एक पवित्र स्मृति चिन्ह है, जो सूती या रेशमी कपड़े पर बौद्ध देवताओं, मंडलों और बुद्ध के जीवन दृश्यों को दर्शाता है। यह हस्तनिर्मित कला सिक्किम की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जिसे अक्सर घर की सजावट और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाया जाता है। इन्हें रोल करके आसानी से ले जाया जा सकता है, जो यात्रियों के लिए एक बेहतरीन सोवेनियर है। यह पारंपरिक कलाकृति सिक्किम के निवासियों के लिए धार्मिक विश्वास और आस्था का प्रतीक है। 
           इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, पीआईबी गंगटोक के सहायक निदेशक श्री मानस प्रतिम शर्मा, पीआईबी रायपुर के सहायक निदेशक श्री सुदीप्तो कर, श्री पुरुषोत्तम झा और श्री सरद बसनेत,
पत्रकार श्री बेनु प्रकाश तिवारी, श्री विकास क्षेत्री, श्री होमनाथ दाबरी, श्री ईश्वर, सुश्री अर्चना प्रधान, सुश्री अनुशीला शर्मा, श्री प्रकाश अधिकारी, श्री ललित दहल, श्री विनोद तमंग, श्री मोहन कुमार कार्की, श्री नार बहादुर क्षेत्री उपस्थित थे।
धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित धरा को सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही हमारी सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय* *सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़, कहा - छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला* *“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान* *सिक्किम से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात* *मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसान हितैषी योजनाओं, उद्योग नीति तथा नक्सल पुनर्वास नीति को मिली सराहना* धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित धरा को सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही हमारी सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय*  *सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़, कहा - छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला*  *“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान*  *सिक्किम से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात*  *मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसान हितैषी योजनाओं, उद्योग नीति तथा नक्सल पुनर्वास नीति को मिली सराहना* Reviewed by dainik madhur india on 10:12 AM Rating: 5

श्रम मंत्री श्री देवांगन ने ली श्रम विभाग की मैराथन समीक्षा बैठक, दिए आवश्यक निर्देश* *योजनाओं के क्रियान्वयन, श्रमिकों की सुरक्षा पर विशेष फोकस*

*श्रम मंत्री श्री देवांगन ने ली श्रम विभाग की मैराथन समीक्षा बैठक, दिए आवश्यक निर्देश*

*योजनाओं के क्रियान्वयन, श्रमिकों की सुरक्षा पर विशेष फोकस*

रेखा चौधरी स्थानीय संपादक रायपुर




रायपुर, / श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने आज गुरुवार को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में श्रम विभाग की दो चरणों में मैराथन समीक्षा बैठक ली। प्रथम चरण की बैठक में श्रम विभाग के अंतर्गत आने वाले तीनों मंडलों की योजनाओं और कारखानों में श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर समीक्षा की गई। मंत्री श्री देवांगन ने अधिकारियों को निर्देश दिए की कारखाने की नियमित तौर पर निरीक्षण करें। श्रमिकों की हितों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें। कमी मिलने पर संबंधित उद्योग को निर्देशित करें। हर महीने किए जाने वाले निरीक्षण की भी समीक्षा करने की निर्देश दिए गए। 

बैठक में उपस्थित अधिकारियों को श्रम मंत्री ने कहा कि श्रमिकों के कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, उनके हितों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा अनुरूप श्रमिक भाई बहनों को योजनाओं के ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलवाए, सुरक्षा के मानको का पूरा ख्याल रखने का प्रयास करें। श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण, और योजनाओ का क्रियान्वयन समय अवधि में पूर्ण करें। बैठक में श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, उप सचिव श्री विपुल गुप्ता, अपर श्रमायुक्त एस. एल. जांगड़े, श्रीमती सविता मिश्रा, बीओसी सचिव गिरीश रामटेके सहित जिलो से आए मैदानी अधिकारी उपस्थित रहे।

*कॉन्ट्रैक्ट श्रमिक अधिनियम पर विशेष फोकस करें*

बैठक में श्रम मंत्री श्री देवांगन ने कॉन्ट्रैक्ट श्रमिक अधिनियम को लेकर विशेष निर्देश दिए गए। इस अधिनियम के तहत पंजीकृत श्रमिकों को ईएसआईसी और पीएफ का लाभ सुनिश्चित करने साथ ही श्रमिकों की संख्या का मिलान करने के भी निर्देश दिए गए। ठेकेदार को जितने श्रमिकों का लाइसेंस प्राप्त है, उतने ही श्रमिक कार्यरत है की नहीं यह सुनिश्चित करने कहा गया।

इसके साथ-साथ निजी कंपनिययों से सेवानिवृत हो चुके कर्मियों के उपादन भुगतान संबंधी मामले के जल्द निराकरण, विभिन्न माध्यमों से आने वाले शिकायतों का समय अवधि में निराकरण, करने के निर्देश दिए गए।

*सात जिलों में शहीद वीर नारायण श्रम अन्न केंद्र प्रारंभ करने की निर्देश* 

बैठक में मुख्यमंत्री की घोषणा शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के अंतर्गत किफायती दर पर भोजन केंद्र की भी समीक्षा की गई। प्रदेश के साथ जिलों में जल्द ही श्रम अन्न केंद्र प्रारंभ करने निर्देश दिए गए। इनमें मुंगेली, सक्ति, जगदलपुर, कांकेर, खैरागढ़ छुई खदान गंडई, जशपुर और जगदलपुर में केंद्र शुरू करने कहा गया है।
   
*श्रमिकों के स्वास्थ्य के नियमित जांच करने की निर्देश* 

दूसरे चरण की बैठक में मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं और औद्योगिक स्वास्थ्य सुरक्षा के अधिकारियों की संयुक्त बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। श्रम मंत्री श्री देवांगन ने सभी जिलों के डिस्पेंसरी की समीक्षा की। ओपीडी की संख्या को और बढ़ाने और श्रमिकों के गुणवत्तापूर्ण इलाज के निर्देश दिए गए। डिस्पेंसरी के स्टाफ की रोजाना हाजिरी बायोमेट्रिक के आधार पर करने के निर्देश दिए। प्रमुख डिस्पेंसरी में सुविधा और बढ़ाने कार्य योजना बनाने कहां गया है। मंत्री श्री देवांगन ने उद्योगों में नजदीकी डिस्पेंसरी का पता चस्पा करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कारखाने की नियमित जांच कर उनमें आवश्यक कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए गए।
श्रम मंत्री श्री देवांगन ने ली श्रम विभाग की मैराथन समीक्षा बैठक, दिए आवश्यक निर्देश* *योजनाओं के क्रियान्वयन, श्रमिकों की सुरक्षा पर विशेष फोकस* श्रम मंत्री श्री देवांगन ने ली श्रम विभाग की मैराथन समीक्षा बैठक, दिए आवश्यक निर्देश*  *योजनाओं के क्रियान्वयन, श्रमिकों की सुरक्षा पर विशेष फोकस* Reviewed by dainik madhur india on 10:05 AM Rating: 5

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