पौष्पी पाणिनिप्रक्रिया का विश्वपरिचय एवं काशी तथा जयपुर के शास्त्रपण्डितों का विद्वत्सम्मान 1 मई को बिलासपुर नगर में दैनिक मधुर इंडिया संपादक प्रदीप मिश्रा।बिलासपुर।
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पौष्पी पाणिनिप्रक्रिया का विश्वपरिचय एवं काशी तथा जयपुर के शास्त्रपण्डितों का विद्वत्सम्मान 1 मई को बिलासपुर नगर में
दैनिक मधुर इंडिया संपादक प्रदीप मिश्रा।बिलासपुर।
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ - 1 मई 2026 को पाणिनीय शोध संस्थान द्वारा विशिष्ट संगोष्ठी का आयोजन नगर स्थित लक्खीराम सभा ग्रह में प्रातः 10 बजे से सम्पन्न होने जा रहा है। यह आयोजन भारतीय ज्ञान परम्परा के अद्वितीय संकल्प को जागृत करता है और संस्कृत व्याकरण की वैश्विक महत्ता को पुनः रेखांकित करता है।संस्कृत व्याकरण विश्व की भाषाविज्ञान परम्पराओं में अत्यन्त विशिष्ट स्थान रखता है। इसी परम्परा के अध्ययन को सरल और सुलभ बनाने हेतु आचार्या पुष्पा दीक्षित जी ने अपने गहन चिन्तन से पौष्पी पाणिनिप्रक्रिया का निर्माण किया है।उक्त जानकारी देते संस्था के सचिव चन्द्र प्रकाश बाजपेयी ने बतलाया कि डॉ पुष्पा दीक्षित द्वारा बनाई यह प्रक्रिया पाणिनीय शास्त्र की जटिलताओं को सहज बनाती है और वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति की विलक्षण पहचान स्थापित करती है।इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य पाणिनि-प्रक्रिया के ऐतिहासिक, भाषिक और शैक्षिक आयामों पर विचार-विमर्श करना है। कार्यक्रम में शैक्षणिक व्याख्यान, छात्र प्रतिवेदन और विशिष्ट अतिथियों के उद्बोधन सम्मिलित होंगे। इन चर्चाओं से पाणिनीय अध्ययन के नवाचार और संरक्षण के लिए नई दिशाएँ प्राप्त होने की संभावना है। विशेष अवसर पर काशी और जयपुर के शास्त्रपण्डितों का सम्मान किया जाएगा। यह विद्वत्सम्मान उन विद्वानों के प्रति कृतज्ञता है जिन्होंने संस्कृत अध्ययन और पाणिनीय परम्परा में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी जी तथा सारस्वत अतिथि प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी जी होंगे। उनकी उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक गरिमामय बनाएगी। विशेष रूप से इस गरिमापूर्ण आयोजन के संरक्षक एवं वरिष्ठ विधायक तथा पूर्व मन्त्री माननीय अमर अग्रवाल जी भी एवं गणमान्य अतिथि इस आयोजन में अपनी सहभागिता करेंगे।यह परिचर्चा केवल एक शैक्षिक सभा नहीं, बल्कि पाणिनीय परम्परा को समकालीन संदर्भ में पुनःस्थापित करने का एक सशक्त प्रयास है। आयोजकों का विश्वास है कि इस संगोष्ठी से भारतीय शैक्षिक नीतियों में पाणिनीय पद्धति के समावेश हेतु ठोस कदम उठाए जा सकेंगे। साथ ही यह आयोजन युवा प्रतिभाओं के सशक्तीकरण और नवीन छात्रों के संवाद का उदय सिद्ध होगा। चन्द्र प्रकाश बाजपेयी ने बतलाया आचार्या दीक्षित जी द्वारा स्थापित पौष्पी पाणिनिप्रक्रिया-विज्ञान प्राचीन शास्त्र परम्परा और आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा के संगम का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह मंच विद्वानों, शोधकर्ताओं, छात्रों और नीति-निर्माताओं के लिए विचार-विमर्श, सहयोग और नवाचार के द्वार खोलेगा।
पाणिनीय शोध संस्थान द्वारा तैयार किया गया यह कार्यक्रम संस्कृत अध्ययन के भविष्य के लिए निःसन्देह प्रेरणास्पद सिद्ध होगा। इस संगोष्ठी के माध्यम से भारतीय ज्ञान परम्परा की गहराई और उसकी वैश्विक प्रासंगिकता को पुनः अनुभव किया जा सकेगा। यह आयोजन न केवल विद्वानों के सम्मान का अवसर है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कृत अध्ययन की नई राहें खोलने का भी संकल्प है।
पौष्पी पाणिनिप्रक्रिया का विश्वपरिचय एवं काशी तथा जयपुर के शास्त्रपण्डितों का विद्वत्सम्मान 1 मई को बिलासपुर नगर में दैनिक मधुर इंडिया संपादक प्रदीप मिश्रा।बिलासपुर।
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