दतिया मांझी समाज ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, ओबीसी सूची से हटाने की मांग* *विंध्य क्षेत्र के धीमर, केवट, मल्लाह, भोई को मूल मांझी जनजाति में शामिल करने का हवाला*
*दतिया मांझी समाज ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, ओबीसी सूची से हटाने की मांग*
*विंध्य क्षेत्र के धीमर, केवट, मल्लाह, भोई को मूल मांझी जनजाति में शामिल करने का हवाला*
दैनिक मधुर इंडिया मोनू शर्मा दतिया
दतिया, 29 मई 2026* - मांझी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची क्रमांक 12 से तत्कालीन विंध्यप्रदेश की मूल समाहित मांझी जनजाति धीमर, केवट, मल्लाह, भोई को विलोपित किया जाए।
*1950 के परिपत्र का दिया हवाला*
मांझी समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि तत्कालीन विंध्यप्रदेश के राजप्रमुख के परिपत्र क्रमांक 97/XIII/F/CENSUS 49 दिनांक 07 जनवरी 1950 में मांझी जाति के समक्ष धीमर, केवट, मल्लाह, भोई को अनुसूचित जनजाति में समाहित किए जाने की अनुशंसा की गई थी।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि जनजाति कार्य विभाग म.प्र. आयुक्त के पत्र क्रमांक जा.प्रा.समिति/23/12/2023 में भी धीमर, केवट, मल्लाह, भोई को मांझी जनजाति में मूल रूप से समाहित होना स्वीकार किया गया है।
*विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा*
समाज के लोगों ने बताया कि म.प्र. विधानसभा में अतारांकित प्रश्न क्रमांक 1121 दिनांक 13-03-2023 के जवाब में तत्कालीन जनजाति कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह माण्डवे द्वारा विधानसभा में यह स्वीकार किया जा चुका है कि मांझी जनजाति में तत्कालीन विंध्यप्रदेश के केवट, धीमर, मल्लाह, भोई समाहित हैं और यही मूल मांझी जनजाति है।मांझी समाज के जिला अध्यक्ष ने बताया कि विंध्यप्रदेश के अन्तर्गत आने वाले जिलों रीवा, सीधी, शहडोल, सतना, छतरपुर, दतिया, टीकमगढ़ में "मांझी" नाम की कोई अलग जाति नहीं पाई गई है। यहां धीमर, केवट, मल्लाह, भोई ही मूल समाहित मांझी जनजाति के रूप में मान्य हैं। ये विंध्यप्रदेश के पुकारू शब्द हैं।
समाज ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि संदर्भित दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची क्रमांक 12 से तत्कालीन विंध्यप्रदेश की मूल समाहित मांझी जनजाति धीमर, केवट, मल्लाह, भोई को विलोपित किया जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में मांझी समाज के जिला अध्यक्ष पूरन केवट सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित रहे। कलेक्टर ने ज्ञापन लेकर उचित माध्यम से शासन को भेजने का आश्वासन दिया।
दतिया मांझी समाज ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, ओबीसी सूची से हटाने की मांग* *विंध्य क्षेत्र के धीमर, केवट, मल्लाह, भोई को मूल मांझी जनजाति में शामिल करने का हवाला*
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