बिजुरी कांड सवाल दर सवाल… जवाब कौन देगा? रेलवे ट्रैक, बरगद का पेड़ और रहस्य में बदलती एक कहानी कैलाश पाण्डेय
बिजुरी कांड सवाल दर सवाल… जवाब कौन देगा?
रेलवे ट्रैक, बरगद का पेड़ और रहस्य में बदलती एक कहानी
कैलाश पाण्डेय
अनूपपुर जिले का बिजुरी नगर इन दिनों अजीब बेचैनी में जी रहा है। रेलवे स्टेशन चौराहे की चाय दुकानों से लेकर गलियों तक हर जुबान पर सिर्फ एक ही चर्चा है आखिर उस रात बरगद के पेड़ के नीचे ऐसा क्या हुआ था, जिसने पूरे नगर को सवालों के अंधेरे में धकेल दिया? 20 मई की शाम… रेलवे ट्रैक के पास अंधेरा उतर रहा था। स्टेशन की तरफ जाती पटरियों के किनारे पुराने बरगद के पेड़ के नीचे एक युवती और उसके साथ मौजूद नाबालिग युवक बैठे थे। दोनों जिंदा थे… शायद सामान्य बातचीत कर रहे थे… शायद आने वाले खतरे से अनजान। पुलिस की कहानी कहती है कि तभी वहां दो बदमाश पहुंचे। युवक पर हमला हुआ, उसे घायल किया गया और युवती को घसीटकर अंधेरे में ले जाया गया। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान युवती की मौत हो गई। घटना के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने दो आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा कर दिया। प्रेस नोट जारी हुआ, तस्वीरें सामने आईं और बताया गया कि मामला सुलझा लिया गया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, वैसे-वैसे सवाल बढ़ते गए। बिजुरी नगर में अविश्वास फैलने लगा। लोगों को लगने लगा कि घटना जितनी दिखाई जा रही है, उससे कहीं ज्यादा गहरी है। रेलवे स्टेशन चौराहे की पुरानी चाय दुकान पर हर शाम चौपाल जमने लगी। उसी चौपाल में बैठे बुजुर्ग कक्का से घसीटा ने एक दिन पूछा “कक्का… अगर पुलिस ने सच पकड़ लिया था… तो फिर नगर में इतने सवाल क्यों उठ रहे हैं?” कक्का ने कुछ देर चुप रहने के बाद धीमे स्वर में कहा “बेटा… जब कहानी जल्दी लिख दी जाए, तो सवाल देर तक पीछा करते हैं।” सबसे पहले सवाल दोनों के वहां होने को लेकर उठने लगे। दोनों वहां क्यों गए थे? क्या यह सिर्फ सामान्य मुलाकात थी? क्या किसी तीसरे व्यक्ति से मिलने की बात थी? घटना से पहले आखिरी फोन कॉल किसकी थी? मोबाइल लोकेशन क्या कहती है? और इन सवालों पर अब तक साफ जवाब क्यों नहीं आया? घसीटा चाय का गिलास मेज पर रखते हुए बोल पड़ा “कक्का… अगर पुलिस सही है तो फिर इतनी बातें छिपी-छिपी क्यों लग रही हैं?” कक्का ने रेलवे ट्रैक की तरफ देखते हुए जवाब दिया “क्योंकि सच जितना दबाया जाता है… सवाल उतने ही बड़े हो जाते हैं।” लेकिन असली सनसनी तब फैली जब वही युवक, जिसे पुलिस पूरे मामले का इकलौता चश्मदीद गवाह बता रही थी, अचानक ट्रेन के सामने कूदकर जान दे देता है। पूरे बिजुरी नगर में सन्नाटा फैल गया। चौरंगी लाल चौपाल में गुस्से से बोल पड़े “अगर वही पूरा गवाह था… तो उसकी सुरक्षा कहां थी?” यही सवाल अब हर गली में गूंज रहा है। क्या पुलिस ने उसकी मानसिक स्थिति की जांच कराई थी? क्या उसे सुरक्षा दी गई थी? क्या उसके बयान रिकॉर्ड कर सुरक्षित रखे गए थे? क्या वह किसी दबाव में था? क्या उसने ऐसा कुछ देख लिया था जिसे वह सहन नहीं कर पा रहा था? या फिर सच बोलने से पहले उसकी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई? कक्का ने भारी आवाज में कहा “बेटा… कई बार आदमी मौत से नहीं… सच के बोझ से टूट जाता है।” सवाल यहीं खत्म नहीं होते। परिजनों और स्थानीय लोगों का दावा है कि युवती के हाथ में संघर्ष के निशान थे। शरीर से खून निकल रहा था। और अन्य साक्ष्य मौजूद थे। लेकिन नगर में चर्चा है कि उन पहलुओं की गहराई से जांच क्यों नहीं हुई? चौरंगी लाल ने चौपाल में फिर सवाल उठाया “अगर इतने सबूत थे… तो पूरी वैज्ञानिक जांच कहां है?” फिर एक और विवाद सामने आया युवती की उम्र को लेकर। पुलिस ने प्रेस नोट में युवती की उम्र 20 वर्ष बताई, जबकि परिवार और कांग्रेस नेताओं का दावा है कि वह नाबालिग थी। अगर वह नाबालिग थी, तो क्या पूरे मामले की कानूनी दिशा बदलती? क्या जांच का स्वरूप अलग होता? और अगर ऐसा था, तो उम्र को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों हुई? जिला कांग्रेस अध्यक्ष गुड्डू चौहान सहित कांग्रेस नेताओं ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर आरोप लगाया कि जांच अधूरी है, कई तथ्यों को दबाया गया और थाना प्रभारी कहानी गढ़ रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल वही है जो बिजुरी नगर की हवा में तैर रहा है आखिर पुलिस किसे बचाना चाहती है? क्या मामला सिर्फ दो आरोपियों तक सीमित है? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का नाम सामने आने वाला था? क्या इसी कारण पूरी घटना को जल्दबाजी में “सुलझा हुआ केस” बताने की कोशिश हुई? कक्का चौपाल में बैठे-बैठे धीरे से कहते हैं “अपराध से बड़ा डर सच का होता है बेटा… और जब सच दबने लगे… तो समझ लो सवाल बहुत बड़े हैं।” अब रात होते ही रेलवे लाइन की तरफ पसरा सन्नाटा लोगों को बेचैन कर देता है। बरगद का वही पेड़ अब केवल पेड़ नहीं रहा, बल्कि उन अनगिनत सवालों का प्रतीक बन चुका है जिनका जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है। एक तरफ युवती की मौत… दूसरी तरफ इकलौते गवाह की आत्महत्या… तीसरी तरफ जल्दबाजी में तैयार पुलिस कहानी… इन सबके बीच बिजुरी नगर अब भी एक ही सवाल पूछ रहा है सच क्या है? और उसका जवाब कौन देगा?
बिजुरी कांड सवाल दर सवाल… जवाब कौन देगा? रेलवे ट्रैक, बरगद का पेड़ और रहस्य में बदलती एक कहानी कैलाश पाण्डेय
Reviewed by dainik madhur india
on
8:18 PM
Rating:
Reviewed by dainik madhur india
on
8:18 PM
Rating:

No comments: