सीतापुर में जीएसटी फर्जीवाड़े पर शिकंजा कूट रचित अभिलेखों से बनी फर्जी फर्मों का जाल, 11 शातिर गिरफ्तार
सीतापुर में जीएसटी फर्जीवाड़े पर शिकंजा कूट रचित अभिलेखों से बनी फर्जी फर्मों का जाल, 11 शातिर गिरफ्तार
दैनिक मधुर इंडिया न्यूज़ अजय मिश्रा
सीतापुर। कूट रचित अभिलेखों के आधार पर फर्जी जीएसटी फर्में बनाकर हजारों करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व की चोरी करने वाले संगठित गिरोह पर पुलिस ने लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई कर सनसनी फैला दी है। हालिया दो अभियानों में कुल 11 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में नकदी, डिजिटल उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज और सैकड़ों फर्जी बिल बरामद किए गए हैं।
जनता के बीच अब बड़ा सवाल गूंज रहा है — क्या इस जीएसटी चोरी से अर्जित अकूत संपत्ति को जब्त कर सरकारी नुकसान की भरपाई होगी, या फिर कई मामलों की तरह फर्मों को ‘कालातीत’ घोषित कर फाइलों में इति श्री कर दी जाएगी?
9 जनवरी 2026: खैराबाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई
थाना खैराबाद पुलिस टीम ने 9 जनवरी 2026 को जीएसटी चोरी गैंग के 07 अंतर्जनपदीय अभियुक्तों को दबोचा।
गिरफ्तार अभियुक्त:
आसिफ पुत्र मो. यामीन निवासी जहांगीराबाद, थाना सदरपुर, सीतापुर,अनवारुल हक पुत्र जलीश अहमद निवासी शाहकुलीपुर, थाना लहरपुर,मो. अम्मार पुत्र मो. अकरम निवासी जहांगीराबाद, थाना सदरपुर,उजैर पुत्र मोईनुद्दीन निवासी 130/507 बाकरगंज, थाना बाबूपुरवा, कानपुर
अब्दुल नासिर पुत्र अब्दुल रऊफ निवासी महाराजागंज, थाना बिसवां,जीशान पुत्र आलम निवासी मजाशाह, थाना लहरपुर,मो. आरिफ पुत्र मो. इदरीश निवासी थवई टोला, थाना बिसवां
बरामदगी:
₹8,00,000 नकद
37 मोबाइल फोन
80 सिम कार्ड
37 एटीएम कार्ड
39 स्टैम्प
18 बिल बुक
10 पैन कार्ड
57 चेकबुक
10 बैंक पासबुक
135 विभिन्न बैंकों के चेक
09 डिजिटल सिग्नेचर यूएसबी डिवाइस,2 हार्ड डिस्क,651 फर्जी बिल,सभी अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।
28 फरवरी 2026:
*अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़*
28 फरवरी 2026 को सीतापुर पुलिस की संयुक्त नगर टीम ने गैर-राज्यों में टैक्स चोरी करने वाले 04 और शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार अभियुक्त:
सोना उर्फ आशीष (आगरा)
कुलदीप सिंह (आगरा)
विवेक कुमार (आगरा)
सूरज रावत (अल्मोड़ा, उत्तराखंड)
बरामदगी:
₹2,30,000 नकद,3 लैपटॉप,8 एंड्रॉयड मोबाइल,23 सिम कार्ड,70 रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्रों की प्रतियां,आधार कार्ड व प्रतियां,6 बिजली बिल प्रतियां,3 ओनरशिप डिटेल,1 पैन कार्ड,6 एटीएम,1 चेकबुक,3 पासबुक,4 डायरी पन्ने,2 अंगूठी व 1 चेन (पीली धातु)
बिना नंबर प्लेट की महिंद्रा 3XO कार
*जांच के घेरे में बैंक और विभागीय भूमिका?*
इतने बड़े पैमाने पर फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों का लेन-देन होने के बावजूद संबंधित विभागों और बैंकों को समय रहते भनक क्यों नहीं लगी — यह सवाल भी अब उठने लगा है। चर्चा है कि कई मामलों में गरीब प्रोपराइटर दिखाकर फर्मों को निष्क्रिय या कालातीत घोषित कर दिया जाता था।
अब शासन स्तर से सख्ती के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक जीएसटी चोरी से अर्जित संपत्ति की जब्ती की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है, जिससे सरकारी राजस्व की भरपाई संभव हो सके। हालांकि इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि शेष है।
*आगे क्या?*
ताबड़तोड़ कार्रवाई से स्पष्ट है कि पुलिस इस संगठित आर्थिक अपराध की जड़ों तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में और खुलासे व बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।
जनपद में इस कार्रवाई से सनसनी का माहौल है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाकई जीएसटी फर्जीवाड़े से अर्जित संपत्ति जब्त कर सरकारी नुकसान की भरपाई होगी — या फिर यह मामला भी फाइलों में सिमट जाएगा?
बाक्स
*जीएसटी चोरों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई*
लहरपुर जीएसटी चोरी प्रकरण की एक कड़ी उन बैंकों से भी जुड़ती है जहां पर इतने बड़े करोड़ों करोड़ों के लेनदेन हुए क्या वह बैंक के भी आएंगे जांच की जड़ में, जितनी जिम्मेदारी बैंकों की है उतनी ही जिम्मेदारी जीएसटी विभाग के उन अधिकारियों की भी बनती है की फर्म का रजिस्ट्रेशन करते समय कूट रचित अभिलेखों के आधार पर रजिस्टर्ड की गई फार्मो की जांच आखिर कौन करेगा, ऐसी स्थिति में जिम्मेदारों का मानना है कि इस जांच की कड़ी की जड़ में कौन-कौन आएगा यह अभी कहना भविष्य के गर्भ में है।
सीतापुर में जीएसटी फर्जीवाड़े पर शिकंजा कूट रचित अभिलेखों से बनी फर्जी फर्मों का जाल, 11 शातिर गिरफ्तार
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