"धर्म" ही एक ऐसा शस्त्र है जो कर्मों को परास्त कर सकता है:-साध्वी श्री प्रतीक्षा श्री जी महाराज साहब
"धर्म" ही एक ऐसा शस्त्र है जो कर्मों को परास्त कर सकता है:-साध्वी श्री प्रतीक्षा श्री जी महाराज साहब
खिरकिया से संजय नामदेव की रिपोर्ट
खिरकिया।खिरकिया समता भवन में विराजित शासन दीपिका श्री दर्शना श्री जी महाराज साहब, श्री रिद्धि प्रभा जी महाराज एवं श्री प्रतीक्षा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा 3 के सानिध्य में श्रद्धाशील उपासक जिनवाणी का अमृत रस पान का लाभ ले रहे हैं। आज दिनांक 27/08/2022 को खिरकिया कुल दीपिका श्री प्रतीक्षा श्री जी महाराज साहब ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि - जहां अच्छे कर्म व्यक्ति के जीवन को प्रगति की दिशा में ले जाते हैं वही बुरे कर्म से उसे पतन की ओर ले जाते हैं ।मनुष्य को, किए हुए शुभ या अशुभ कर्मों का फल अवश्य ही भोगना पड़ता है ।हमारा अगला भव किस रूप में होगा यह सब कुछ हमारे कर्मों पर ही निर्भर करता है ।अनेक जन्मों में किए हुए कर्म हमारी आत्मा में संगृहीत हो जाते हैं वे संचित कर्म कहलाते हैं। कर्म किए बगैर व्यक्ति किसी भी क्षण नहीं रह सकता ।कर्म हमारे अधीन है उसका फल नहीं ।अच्छे कर्मों को करने और बुरे कर्मों का परित्याग करने में ही हमारी भलाई है ।सारा खेल कर्मों का है। हम कर्म अच्छा करते नहीं और फल बहुत अच्छा चाहते हैं यह कैसे संभव है। जीवन की परिस्थितियां ही कर्मों का फल है। सभी परिस्थितियां समान नहीं होती अतः सभी के कर्म समान नहीं होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि- सत्ता दो प्रकार की होती है कर्म सत्ता और धर्म सत्ता। इन दोनों सत्ताओ मे युद्ध होता है तो धर्म सत्ता को ही विजय मिलती है। संसार में एक धर्म ही ऐसा शस्त्र है जो कर्मों को परास्त कर सकता है । जब हम कर्मों का बंध करते हैं तब हमें सावधान रहने की आवश्यकता है ,जब कर्म उदय में आते हैं समभाव रखने की आवश्यकता है और जब कर्म सत्ता में रहे तब धर्म आराधना करके उसे परास्त करने का लक्ष्य रखें तभी हमारा मानव जीवन सार्थक होगा। महाराज साहब की सद प्रेरणा से तपस्या के क्रम में 26 उपवास शालू भंडारी एवं 5 उपवास हरीश नागडा जिन्होंने पूर्व में ही एक साथ 9 के पचखान ग्रहण किए, पूजा मुनोत एवम 4 उपवास के क्रम में विजेता मेहता, केतन भंडारी, पुष्पा कोचर, सुनंदा कोचर, दीपा विनायक,समक्ष बनवट,चंपालाल भंडारी सदंपत्ति आदेश चोपड़ा _ सीमा चोपड़ा ने ग्रहण किए एवम 2 और 1 उपवास के पचखान भी प्रचुर मात्रा में हुए।
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